फॉरेंसिक भाषाविज्ञान के समक्ष कुछ
प्रमुख चुनौतियाँ भी हैं, जैसे-
§ प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी
§ न्यायिक प्रणाली में सीमित जागरूकता
§ मानकीकृत भाषिक उपकरणों का अभाव
इन सीमाओं के बावजूद, यह क्षेत्र निरंतर विकसित हो रहा है।
फॉरेंसिक भाषाविज्ञान के समक्ष कुछ
प्रमुख चुनौतियाँ भी हैं, जैसे-
§ प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी
§ न्यायिक प्रणाली में सीमित जागरूकता
§ मानकीकृत भाषिक उपकरणों का अभाव
इन सीमाओं के बावजूद, यह क्षेत्र निरंतर विकसित हो रहा है।
प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
Professor, Kendriya Hindi Sansthan, Agra
(Managing Director : Ms. Ragini Kumari)
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